Sunday, July 14, 2024
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जिम्बाब्वे में शतक लगाने वाले अभिषेक के पिता का इंटरव्यू:कहा- उसे युवराज सिंह ने खुद ट्रेनिंग दी, अभिषेक में दिखती है उन्हें अपनी परछाईं

अभिषेक शर्मा जिम्बाब्वे के खिलाफ टी-20 मैच में लगातार तीन छक्के लगाकर शतक पूरा करने वाले पहले भारतीय बने। 23 साल के अभिषेक को शतक पूरा करने के लिए सिर्फ 46 गेंदों की जरूरत पड़ी। अभिषेक के पिता राज कुमार, जो खुद फस्ट क्लास क्रिकेट के प्लेयर रह चुके हैं, बताते हैं कि पहली पारी में शून्य पर आउट होने के बाद थोड़ा बुरा लगा था, लेकिन उनकी अभिषेक को सलाह थी कि भूल जाओ सामने कौन है, नेचुरल क्रिकेट खेलो। यही अभिषेक ने दूसरे मैच में किया। यही अभिषेक का नेचुरल क्रिकेट स्टाइल है, जो अब पूरे विश्व ने देखा है। अभिषेक साढ़े तीन साल का था, जब वे क्रिकेट सीखने मैदान में जाने लगा। उसके बाद अभिषेक ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं दिखा। आए जाने अभिषेक के पिता राज कुमार उनकी इस जीत पर क्या कहते हैं… जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी-20 में अभिषेक की पारी सवाल: पहली बार आपको कब लगा कि बेटे को क्रिकेटर बनाना है?
पिता: अभिषेक छोटा था, अभी चलना सीखा था। मैं कोच हूं तो घर में क्रिकेट का सामान इधर-उधर बिखरा रहता था। वे मेरा बैट उठाने की कोशिश करता था। बाद में उसे प्लास्टिक का बैट ला दिया। तो कभी बहनों तो कभी मां को बोल डालने के लिए कहता। तकरीबन साढे तीन साल का था अभिषेक, जब उसने मेरे साथ मैदान में जाना शुरू कर दिया था। रोने लगता था कि मैंने भी क्रिकेट खेलना है। सवाल: युवराज सिंह से अभिषेक की मुलाकात कब हुई, पहली बार भेंट में उन्हें युवराज ने क्या कहा था?
पिता: युवराज सिंह और अभिषेक की पहली मुलाकात रणजी ट्राफी में हुई थी। दोनों पंजाब की तरफ से खेल रहे थे और एक दूसरे के सामने थे। तब दोनों ने एक ही साथ बैटिंग की थी। युवराज ने मुझे उस मैच के बाद बताया था कि उन्हें लगा कि वे ही दूसरी तरफ बैटिंग कर रहे हैं। इधर भी मैं खेल रहा हूं और उधर भी मैं ही खेल रहा हूं। साफ बैटिंग थी अभिषेक की। हर शॉट साफ खेलता है। तभी अभिषेक मन को छू गया। उस मैच के बाद युवी ने अभिषेक से मैदान के बाहर आकर कहा था- अभिषेक मैं तुम्हें इंटरनेशनल लेवल की ट्रेनिंग करवाना चाहता हूं, क्या तू करेगा। अभिषेक का जवाब था- आप मेरे भगवान हो, आपके मैच देख-देख कर बड़ा हुआ हूं। इसके बाद युवराज सिंह ने अभिषेक को बहुत ट्रेनिंग करवाई। आज भी वे मैच के बाद अभिषेक को फोन करते हैं। आज जो भी अभिषेक है, उनके कारण ही है। जो युवराज को ट्रेनिंग करवाते हैं, वही अभिषेक को ट्रेनिंग करवाते हैं। सवाल: अभिषेक लेफ्ट हैंडर बैटसमैन और लेफ्टर हैंडर गेंदबाज भी हैं और युवराज की तरह लंबे-लंबे छक्के भी लगाता है? क्या टीम में युवराज की भरपाई होने जा रही है?
पिता: युवाराज की भरपाई नहीं हो सकती, वे बहुत ऊपर के प्लेयर हैं। अभिषेक उनको देख कर बड़ा हुआ है। अभिषेक को शौक है कि वे भी युवी भाजी की तरह शॉट मारे। उन्हें तो वे अपना गुरु व भगवान मानता है। वे भी अभिषेक को बच्चे की तरह रखते हैं। जहां भी हो, युवराज उसे बुला लेते हैं और अपने साथ ट्रेनिंग करवाते हैं। रात को भी फोन कर देते हैं और उसका शेड्यूल पूछते हैं। सवाल: जब टीम इंडिया में सिलेक्ट हुआ तो आपने पहला सुझाव बेटे को क्या दिए?
जवाब: वे दिन काफी खुशी का था। हिंदुस्तान में जो भी प्लेयर होते हैं, उनकी पहली इच्छा देश के लिए खेलने की होती है। सभी हिंदुस्तान की कैप डालना चाहते हैं। जब मैंने इसके साथ बात की तो मेरा यही कहना था- पहले तू हमारा बेटा था, अब देश का बेटा बन गया है। देश के लिए खेलना। जो मैच खेलोगे, उसे जिताने की कोशिश करना, अच्छा परफॉर्म करना। सवाल: क्या टीम इंडिया में सिलेक्ट होने के बाद क्या युवराज सिंह से भी बात हुई?
जवाब: हां, उनका फोन आता ही रहता है। उन्होंने मुझे बधाई दी थी। अभिषेक अब हिंदुस्तान की टीम में आ गया है। इसकी प्रैक्टिस में कोई कमी नहीं आनी चाहिए। पहले प्रैक्टिस, बाकी काम बाद में। अभिषेक उस समय विदेश में था, इसलिए अभिषेक से क्या बात हुई उन्हें नहीं पता। यही कहा होगा कि देश के लिए अच्छा खेलना, अच्छा परफॉर्म करना। सवाल: पहले मैच में जीरो पर आउट हो गया, तो क्या आपकी उनसे बात हुई?
जवाब: जब पहले मैच में जीरो में आउट हुआ, तो दुख बहुत लगा। इतनी मेहनत कर इस मंजिल में आए। वहां आकर कोई रन ना करना, जीरो पर आउट हो जाना। मुझे लगा कि आज दिन ही नहीं है। मन खराब हुआ कि ये भगवान ने क्या किया। सच्ची मेहनत करके अभिषेक मैदान में गया था। लेकिन भगवान ने कुछ अच्छा सोचा था, अगले ही दिन खुशी दे दी। अभिषेक भी मायूस था। मैंने उसे कहा, भूल जाओ सामने कौन है, नेचुरल क्रिकेट खेलो। अगले ही दिन अभिषेक ने सेंचुरी मार दी। सवाल: सेंचुरी मारने के बाद आपकी बेटे से क्या बात हुई?
जवाब: मेरे साथ रोज बात होती है। मैं उसका पिता भी हूं और कोच भी। मैंने उसे बधाई दी। ये जर्नी अभी स्टार्ट हुई है, और अच्छा खेलो। देश को और आगे लेकर चलो। यही मेरा आशीर्वाद है।

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