Sunday, July 14, 2024
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टॉपर्स मंत्रा-UPSC मेन्स के लिए अंशुमन राज की टिप्स:निबंध, एथिक्स और ऑप्शनल पर पकड़ बनाएं; सिलेबस-करेंट अफेयर्स में हो 65:35 का रेश्यो

मेरा नाम अंशुमन राज है। मैं बिहार के बक्सर का रहने वाला हूं। मैंने कोलकाता से मरीन इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। मैंने करीब 5 पांच साल हॉन्गकॉन्ग में नौकरी की। पहली बार 2018 में UPSC सिविल सर्विसेज एग्जाम क्रैक किया। इस एग्जाम से मेरा सिलेक्शन IRS-कस्टम्स एंड टैक्स सर्विस के लिए हुआ था। मैंने 2019 में एक बार फिर सिविल सर्विसेज का एग्जाम दिया। मैं सेकेंड अटेम्प्ट में IAS के लिए सिलेक्ट हुआ। फिलहाल, मैं मध्य प्रदेश के राजगढ़ के नरसिंहगढ़ में पोस्टेड हूं। UPSC सिविल सर्विसेज का प्रीलिम्स एग्जाम 16 जून को हो चुका है। आज टॉपर्स मंत्रा में IAS ऑफिसर अंशुमन राज से जानेंगे कि UPSC मेन्स एग्जाम की तैयारी किस तरह की जानी चाहिए..
सिलेबस को ध्यान से पढ़ें और समझें। प्रीलिम्स में ये फायदा रहता है कि MCQ बेस्ड एग्जाम होने की वजह से हर सवाल का जवाब हमारे सामने मौजूद रहता है। ऐसे में अगर हमारे कॉन्सेप्ट्स क्लियर हों, तो आंसर किया जा सकता है। कोर सिलेबस को अच्छे से तैयार करें। अगर UPSC कोई सवाल किसी खास मैगजीन या अखबार से पूछता भी है तो ऐसे सवालों की संख्या 2 से 5 ही होती है। ऐसे में इन सवालों पर अपना समय बर्बाद न करें। UPSC का ट्रेंड डिकोड नहीं कर सकते, कोर सब्जेक्ट पर फोकस करें
अगली बार UPSC क्या पूछने वाला है, ये कोई नहीं जानता। किसी ट्रेंड के पीछे जाने की बजाय स्टैटिक पार्ट और करेंट अफेयर्स पर ध्यान दें। इन दोनों चीजों के बीच 65 से 35 का रेश्यो रखें। अगर आपका सिलेबस मजबूत है तो आप करेंट अफेयर्स के सवालों को भी डील कर लेंगे। डेली करेंट अफेयर्स के लिए अलग से क्लास लेने की बजाय दो से तीन कोर सोर्सेज फॉलो करें। वहीं, स्टैटिक पार्ट की तैयारी प्राइमरी सोर्सेज यानी NCERT और एक या दो रेफरेंस किताबों से करें। इन बुक्स की मल्टीपल रीडिंग करें और कॉन्सेप्ट को समझते हुए तैयारी करें। निबंध के लिए जरूरी है आसान लैंग्वेज का इस्तेमाल
मैंने पहले अटेम्प्ट में निबंध के पेपर में 250 में से 147 मार्क्स हासिल किए थे। UPSC की डिमांड यही है कि आप सबसे आसानी से बहने और समझ आने वाली भाषा का इस्तेमाल करें। अगर किसी सवाल की डिमांड ऐसी कि आप कविता या कोट से आंसर की शुरुआत करने से फायदा मिल सकता है, तो इसी पैटर्न को फॉलो करें। अगर जरूरत नहीं महसूस होती, तो किसी फिक्स टेम्पलेट पर आंसर करने से बचें। आप चाहें तो दो से तीन टेम्पलेट खुद अपने लिए तैयार कर लें। मॉक टेस्ट में निबंध की प्रैक्टिस करें। इससे आपको ये समझ में आएगा कि किन टॉपिक्स में आपको परेशानी होती है और क्या टॉपिक्स आपके लिए आसान हैं। निबंध का टॉपिक सिलेक्ट करें और रफ स्ट्रक्चर तैयार करें
पेपर के दौरान 10 मिनट का समय निकालें और ये सिलेक्ट करें कि किस टॉपिक में आप अपना बेस्ट दे पाएंगे और अपने आंसर के जरिए ये साबित कर सकेंगे कि आप में दूरदर्शिता है। रफ पेज में पहले ही अपने निबंध का स्ट्रक्चर तैयार करें कि आप उसकी शुरुआत कैसे करेंगे या बॉडी में क्या शामिल करेंगे। इसे टॉपिक्स और सब टॉपिक्स में बांट लें। आपको लिखने के पहले इतना कॉन्फिडेंस होना चाहिए कि आप इस टॉपिक पर 1000 से 1200 शब्दों में कितना कंटेंट दे पाएंगे। निबंध को हमेशा एक उपसंहार से खत्म करें। ऐसा न लगे कि आपने कोई कहानी सुनाई है, इसलिए इसे एक दिशा देना जरूरी है। एथिक्स के आंसर्स से बताएं कि आपको डिसीजन लेना आता है
एथिक्स का पेपर मेन्स के लिए सबसे जरूरी है। इस पेपर के जरिए आपकी डिसीजन मेकिंग स्किल टेस्ट की जाती है। ऐसे में जरूरी है कि आपको बेसिक्स की समझ हो। इंटीग्रिटी, एम्पैथी जैसे शब्दों की स्टैण्डर्ड डेफिनिशन तैयार रखें। केस स्टडीज भी तैयार करके रखें। इस पेपर का सिलेबस छोटा है और इसमें कुछ नया करने की सबसे ज्यादा गुंजाइश है। अपने आंसर के जरिए ये बताने की कोशिश करें कि आप किस तरह सोचते हैं और आपके मन में नेचुरल जस्टिस की भावना है भी या नहीं। इस पेपर के सवालों को आंसर करते वक्त ये ध्यान रखें कि सिर्फ मोरल वैल्यूज को पेपर पर लिखना मकसद नहीं है, बल्कि उसे लॉजिकल तरीके से पेश करने से आपका काम पूरा होगा। पहली रीडिंग के साथ बनाएं माइक्रो सिलेबस की लिस्ट
जब आप पहली रीडिंग कर रहे हों, तो कोशिश करें की साथ-साथ में एक सब टॉपिक्स की लिस्ट बन सके। इसे ऐसे समझें – अगर कोई सब टॉपिक पेपर 1 से रिलेटेड है, लेकिन वो पेपर 2 में रिपीट हो रहा हो आपको ये समझना पड़ेगा कि दोनों पेपर के हिसाब से इस सवाल का जवाब किस तरह देंगे। ऐसे में खुद अपना माइक्रो-सिलेबस तैयार करें। दूसरों से अलग आंसर लिखने के लिए वैल्यू एडिशन करें
अपने आंसर को दूसरों से अलग बनाने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ कुछ खास पॉइंट्स ऐड करते जाएं। जैसे – PRS की वेबसाइट से अलग-अलग कमेटियों के रिकमेंडेशन नोट कर लें। कुछ किताबों से अच्छे कोट्स भी नोट कर सकते हैं। इन चीजों को इम्पॉर्टेंस के हिसाब से अलग-अलग कैटेगरी में बांट लें। इस तरह आप वैल्यू एडिशन कर सकते हैं। आपके आंसर में जितना तगड़ा और नया कंटेंट होगा, आपका स्कोर दूसरों से उतना अच्छा होगा। कॉन्सेप्ट वाइज नोट्स तैयार करें
नोट मेकिंग के लिए किसी एक सोर्स की मदद ले सकते हैं। ऐसे में नोट मेकिंग में आपका कम से कम समय लगेगा। इन नोट्स की मदद से खुद अपने माइक्रो नोट्स बनाएं। जब आपके पास एग्जाम से पहले 10 से 15 दिन का समय हो, तो इसकी मदद लें। हिस्ट्री की थ्योरी और पॉलिटिकल साइंस के अलग-अलग कॉन्सेप्ट्स के लिए अलग से नोट्स बनाएं। आंसरशीट में प्रेजेंटेशन पर ध्यान दें
आंसरशीट में बहुत ज्यादा डायग्राम बनाने से बचें। अगर आप ऐसे डायग्राम या फ्लो चार्ट बना सकते हैं, जिससे आपका आंसर देखने में अच्छा लगे तो ही बनाएं। ऐसा न हो कि आप भारत के मैप में मुंबई को लोकेट कर रहे हों। इसका कोई फायदा नहीं है। अगर पैराग्राफ या बुलेट पॉइंट्स की मदद से आप अपनी बात अच्छी तरह न कह पा रहे हों, तो अलग-अलग टूल्स को फॉलो करने की जरूरत नहीं है।

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