Sunday, July 21, 2024
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NEET केस में SC पहुंचे अलख पांडे बोले-NTA मॉडल फेल:700 नंबरों पर भी अच्छा सरकारी कॉलेज नहीं, JEE की तरह 2 स्टेज में परीक्षा हो

‘2010 में मैं कॉलेज में था, तब भी हम पेपर लीक बहुत सुनते थे। आज 2024 में मैं शिक्षक हूं। मेरे जिंदगी के 14 साल बीत गए लेकिन पेपर लीक आज भी उसी तरह, वैसा ही होता है।’ ये कहना है PW के फाउंडर और टीचर अलख पांडे का। अलख ने NEET UG रिजल्‍ट में गड़बड़ी की शिकायत सुप्रीम कोर्ट में की है। दैनिक भास्‍कर से खास बातचीत में उन्‍होंने हमारे सवालों के जवाब दिए और इस पूरे मामले को पर्त दर पर्त खोला। सवाल- 1: इस साल NEET रिजल्‍ट में बड़ी संख्‍या में टॉपर्स निकले हैं। 700+ स्‍कोर पर भी अच्‍छे सरकारी कॉलेज में एडमिशन मिलना मुश्किल है। इसका क्‍या समाधान हो सकता है? जवाब: हाई स्‍कोर पर बल्किंग एक बड़ी समस्‍या है। इस बार 700 स्‍कोर पर 2300 रैंक है। ये बहुत बड़ी प्रॉब्‍लम है। 720 में से 720 लाने वाला स्‍टूडेंट भी AIIMS दिल्‍ली में दाखिला नहीं पा सकेगा। इस समस्‍या का एक सॉल्‍यूशन हो सकता है कि NEET में भी UPSC या JEE Advanced जैसा पैटर्न अपनाना चाहिए। यानी एक प्रीलिम्‍स के पेपर से कैंडिडेट्स फिल्‍टर कर लें और फिर सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लिए मेन्‍स का पेपर हो। JEE Advanced के रिजल्‍ट में रैंक 1 और रैंक 50 के बीच 40 नंबर का फर्क है, जबकि NEET में रैंक 1 पर ही 67 स्‍टूडेंट्स हैं। ऐसे में 2 टियर एग्‍जाम रैंक बल्किंग का एक सॉल्‍यूशन हो सकता है। सवाल- 2: 2017 से पहले तक NEET का एग्जाम CBSE करवाता था। CBSE के पास बड़े एग्जाम कंडक्ट कराने का एक्सपीरियंस भी था। तो NTA को परीक्षा की जिम्‍मेदारी क्‍यों सौंपी गई? जवाब: सरकार ने NTA के रूप में ऑटोनोमस टेस्टिंग एजेंसी बनाई थी। ऐसा नहीं है कि NTA सिर्फ NEET का बल्कि JEE, CUET, UGC NET का भी एग्जाम कंडक्ट करवाता है। मेरा मानना है कि कुछ हद तक ये फैसला समय के हिसाब से सही भी था, क्योंकि परीक्षा विभाग का ऑपरेशनल काम ज्यादा है। लेकिन अभी तक तो जितनी चीजें दिख रही हैं उसके हिसाब से NTA की वर्किंग ठीक नहीं लग रही है। हालांकि ऐसा सिर्फ NTA के साथ नहीं है। जितनी भी बॉडीज एग्जाम कराती हैं, लगभग सभी बॉडी के अंदर पेपर लीक होते हैं। मैं NTA का बचाव नहीं कर रहा हूं, लेकिन सभी बॉडीज पर सवाल उठाने चाहिए। पिछले 5 सालों में अलग-अलग राज्यों में लगभग 40 पेपर लीक हुए हैं। पेपर लीक किसी एक संस्था से रिलेटेड नहीं है। पेपर ली कोई नया नहीं है, Its in the nature of this country। सवाल- 3: पेपर बनाने में, उसे सेंटर्स तक पहुंचाने में या फिर एग्जाम सेंटर पर बांटने में, किस लेवल पर गलती होती है, जिसकी वजह से पेपर लीक होता है? जवाब: पेपर लीक के पीछे एक पूरा सिंडिकेट है। जैसे-जैसे देश प्रोग्रेस करता गया, सिंडिकेट भी प्रोग्रेस करता गया। हम टेक्नोलॉजी लेकर आए तो वह भी टेक्नोलॉजी लेकर आए। हम थंब प्रिंट लेकर आए तो वो थंब प्रिंट की नकली शीट ले आए। अब हम बायोमेट्रिक लेकर आए हैं तो वे इसका भी तोड़ लेकर आ गए। झज्जर में जिस व्यक्ति को बैंक से पेपर लेकर सेंटर आना था, उस बैंक के अधिकारी ने उनको कहा कि आप दूसरे बैंक से भी पेपर लेकर आओ। तो हुआ ये कि 2 सेट ऑफ पेपर आ गए। बच्चों को दो सेट पेपर बंट गए जिसके चलते पूरी गड़बड़ी हुई। यानी पेपर डिस्टि्रब्‍यूशन में भी चैलेंज है। सवाल- 4: 2021 में 640 नंबर पर रैंक बनती है 6 हजार, 2022 में बनती है 7 हजार, 2023 में 10 हजार। इस साल 2024 में इतने ही स्‍कोर पर 40 हजार रैंक मिली है। क्‍या इतनी एनॉमली संभव है? जवाब: हमने इतनी एनॉमली कभी नहीं देखी। NTA ने कहा कि हमने पेपर NCERT से बना दिया। इसीलिए पेपर आसान हो गया और कटऑफ, मेरिट ऊपर चली गई। अगर NTA की बात थोड़ी देर के लिए मान लेते हैं, पर ऐसा हुआ है कि एक ही नंबर पर सात से ज्यादा लोग आ गए। बहुत ज्यादा लोगों के 650 के ऊपर नंबर आ गए। तो आप ऐसा पेपर बनाते ही क्यों हैं? फिर तो एग्जाम ऑफ रिजेक्शन को आपने एग्जाम ऑफ सिलेक्शन बना दिया। इसके डिफेंस में ये लाइन आती है कि हमने बच्चों का डिप्रेशन कम करने के लिए ऐसा किया ताकि बच्चे कोई गलत स्टेप ना लें। देखिए अब बच्‍चों के नंबर ज्यादा आ रहे हैं। मेरा कहना है कि यह बोर्ड एग्जामिनेशन नहीं है। अगर आप सभी बच्चों को 95% दे देंगे तो ऐसा नहीं है कि वह डिप्रेस नहीं होगा। NEET में आप कितने भी बच्‍चों को 720 में से 700 नंबर दे दो, कितनों को भी 715 दे दो लेकिन नंबर ऑफ सीट्स तो लिमिटेड हैं। ऐसे में बच्चे का डिप्रेशन तभी कम होगा जब नंबर ऑफ सीट्स बढ़ेंगी। अगर एक स्टूडेंट्100 नंबर लाकर भी अपने मनपसंद कॉलेज में नहीं जा रहा तो वह डिप्रेस होगा ही। सवाल- 5: क्‍या 1563 स्‍टूडेंट्स को ग्रेस मार्क्‍स देने से पूरे रिजल्‍ट में इतनी बड़ी गड़बड़ी हो सकती है? जवाब: ऐसा बिलकुल संभव नहीं है। 1563 एक फेक नंबर है जो NTA ने खुद से गढ़ा है। NTA ऑन रिकॉर्ड मान रहा है कि 4 स्टेट के 6 सेंटर्स में पेपर में देरी हुई। गलत पेपर बंटा। इसके कोई सबूत नहीं हैं और इसके ऊपर कोई जांच नहीं हुई है। मेरा मानना है कि सिर्फ 4 स्टेट नहीं, उससे ज्यादा हैं। ये 6 सेंटर नहीं है, उससे ज्यादा है। 1563 बच्चों ग्रेस दिया, लेकिन ये संख्या उससे कहीं ज्यादा है। 6 सेंटर पर ऐवरेज 500 बच्‍चों के हिसाब से 3 हजार स्‍टूडेंट्स होने चाहिए। तो क्‍या आपने खास कमरों में ग्रेस मार्क्‍स दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट में NTA ने माना है कि पूरे सेंटर को ग्रेस मार्क्स दिए हैं। यानी ये नंबर 1500 से तो कहीं ज्‍यादा होना चाहिए। 4750 सेंटर्स पर लगे 50 हजार कमरों के cctv फुटेज हैं। इतने फुटेज चेक करना संभव नहीं है। 2018 के CLAT एग्‍जाम के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ऐसे कई बच्‍चे हैं जो कोर्ट नहीं पहुंचते, उन्‍हें भी शिकायत दर्ज करने का मौका मिलना चाहिए था। इसके लिए आप एक ईमेल आईडी बनाएं और बच्‍चों से शिकायतें लें। CLAT ने शुरुआत में कहा था 25 बच्‍चे पीड़‍ित हैं, जबकि आखिर में नंबर निकला 5667। NEET मामले भी सही नंबर 2 लाख से ज्यादा होगा। NTA सुप्रीम कोर्ट की हियरिंग में पहले दिन कहता है कि 1563 कैंडिडेट्स के स्‍कोरकार्ड रद्द कर रहे हैं। इसका मतलब है अब पूरी दुनिया कभी जान ही नहीं पाएगी कि असल नंबर क्या था। कितने स्टूडेंट्स को ग्रेस दिया, वो कितने स्‍टेट्स के थे। सवाल- 6: हरियाणा के स्टूडेंट यश कटारिया के केस में उसे 78 ग्रेस मार्क्‍स मिले हैं। यानी ओरिजिनल स्‍कोर 640 से बढ़कर फाइनल स्कोर 718 हो गया। ये ग्रेस NTA ने किस आधार पर दिए हैं। जवाब: NTA ने कहा कि हमने ग्रेस मार्क्स, टाइम लॉस के आधार पर दिए हैं। हमने सुप्रीम कोर्ट के 2018 के जजमेंट का इस्तेमाल किया है जो कहता है कि टाइम लॉस होने पर आप आंसरिंग एफिशिएंसी को कैलकुलेट करके ग्रेस मार्क्स दे सकते हैं। आंसरिंग एफिशिएंसी के दो पार्ट होते हैं- 1. बच्चे की आंसर देने की स्पीड 2. एक्युरेसी मान लीजिए किसी बच्चे को पेपर 1 घंटे देर से मिला। फिर उसने सॉल्व करना स्टार्ट किया। आमतौर पर NEET एग्जाम में बच्चा बायोलॉजी का सेक्शन पहले सॉल्व करता है। वह 45 से 50 मिनट में 90 क्वेश्चन कर लेता है। तो उसकी स्पीड 1 मिनट में 2 क्वेश्चन करने की है। शुरुआत में बच्चा वही क्वेश्चन सॉल्व करना शुरू करता है, जिसको लेकर वह कन्फर्म होता है। ऐसे में ये नजर आता है कि बच्चे की जो आंसरिंग एफिशिएंसी है, वो रीयल नहीं है। बच्चे की आंसरिंग एफिशिएंसी पेपर के आखिरी एक घंटे में खराब होती है। मतलब ये है कि आप बच्चे को उसके बेस्ट परफॉरमेंस पर जज कर रहे हैं लेकिन इवेलुएट कर रहे हैं उसके सबसे बेकार परफॉरमेंस पर। इसके अलावा, मान लीजिए एक बच्चे को पेपर मिलने में 20 मिनट देरी हो जाती है। उसने बचे हुए समय में सभी क्वेश्चन्स अटेम्प्ट कर लिए और उसके 720 में से 680 मार्क्स बने। इस केस में NTA को 20 मिनट का ग्रेस भी देना होगा। 20 मिनट का ग्रेस कैलकुलेट किया गया तो वो 50 नंबर आता है।

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