Tuesday, June 18, 2024
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कश्यप ने बुमराह-अक्षर के साथ सीखीं क्रिकेट की बारीकियां:गुजरात रणजी टीम में मौका नहीं मिला तो ओमान का रुख किया; टी-20 वर्ल्ड कप खेलेंगे

‘काश, मैं थोड़ी और मेहनत कर लेता, तो मुझे टीम इंडिया से खेलने का मौका मिल जाता।’ यह कसक है भारत के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और अक्षर पटेल के साथ क्रिकेट की बारीकियां सीखने वाले कश्यप प्रजापति की। वे लंबे समय तक बुमराह और अक्षर के रूम मेट रह चुके हैं। इतना ही नहीं,
गुजरात की रणजी, अंडर-19 और अंडर-23 टीम के संभावित खिलाड़ियों में रह चुके हैं, लेकिन गुजरात से मौका नहीं मिलने पर ओमान चले गए। 28 साल के कश्यप आज से शुरू हो रहे टी-20 वर्ल्ड कप में ओमान से खेलते नजर आएंगे। ओमान का पहला मैच 3 जून को सुबह 6 बजे से नामीबिया के खिलाफ होगा। कश्यप 2021 के टी-20 वर्ल्ड कप में भी ओमान की टीम का हिस्सा रहे हैं, लेकिन उनका सफर आसान नहीं रहा है। जिस कंपनी ने उन्हें ओमान बुलाया था, वह कोरोना काल में छोड़कर चली गई। ऐसे में ओमान में खाने के भी लाले पड़ गए। वर्ल्ड कप से पहले कश्यप ने स्ट्रगल, करियर और वर्ल्ड कप में ओमान की संभावनाओं पर दैनिक भास्कर से बातचीत की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश… सवाल- आपका परिवार गुजरात में रहता है। ऐसे में ओमान कैसे पहुंच गए?
जवाब- जब मैंने क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी, तब मन में भारत के लिए खेलने का सपना था। मैं चाहता था कि भारत में स्टेट लेवन पर क्रिकेट खेलूं और रणजी जैसे टॉप लेवल टूर्नामेंट में अपने स्टेट को रिप्रिजेंट करूं। भारत में क्रिकेट की शुरुआत करने वाले हर लड़का और लड़की चाहता है कि टीम इंडिया की जर्सी पहनने का मौका मिले। मैं भी यही चाहता था, लेकिन, मुझे मौका नहीं मिला, शायद मैं उससमय अच्छा परफॉर्म नहीं कर सका। अब भी मन में टीम इंडिया से नहीं खेल पाने की कसक है। लगता है कि थोड़ी और मेहनत कर लेता, तो मुझे टीम इंडिया से मौका मिला जाता। अब मेरा टारगेट दुनिया के बड़े-बड़े टी-20 लीग में खेलना है। मैं चाहता हूं कि अपने प्रदर्शन की बदौलत दुनिया के लीगों में हिस्सा ले सकूं। किसी को मेरी पैरवी न करना पड़े। मैं IPL में विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों के साथ खेलना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि एक बार मुझे IPL में खेलने का मौका मिले, यहां पर दुनिया के बड़े-बड़े क्रिकेटर आते हैं। ऐसे में इस प्लेटफॉर्म पर मुझे कुछ न कुछ सीखने का मौका मिलेगा। सवाल- आपके करियर की शुरुआत कैसे हुई, क्या क्रिकेट करियर के लिए ही ओमान गए थे?
जवाब- मेरा कोई गॉड फादर नहीं था। मेरे घर में कोई क्रिकेट नहीं खेलता था। ऐसे में मैंने आज जो भी हासिल किया है, वह अपनी मेहनत के दम पर किया है। जब मैं गुजरात में क्रिकेट खेलता था, तब मुझे काफी संघर्ष करने पड़े। 14-15 साल की उम्र में ट्रेनिंग के लिए 6 बजे की ट्रेनिंग के लिए सुबह 4 बजे घर से निकल जाना पड़ता था। मुझे घर से 15-16 KM दूर जाना पड़ा था। पहले मैं करीब 4 KM साइकिल चला कर रेलवे स्टेशन जाता था। फिर वहां से ट्रेन पकड़ता था और फिर अकादमी जाने के लिए 2 बार ऑटो चेंज करता था। मैं अंडर-16 गुजरात से खेल चुका हूं। अंडर-19 और अंडर-23 और रणजी के लिए संभावितों की लिस्ट में था, लेकिन मुझे मौका नहीं मिल पाया। शायद मैं खेले से प्रभावित नहीं कर सका। इसी वजह से मुझे ओमान का रूख करना पड़ा, क्योंकि मैं क्रिकेट ही खेलना चाहता था। मैं पढ़ाई में भी ज्यादा अच्छा नहीं था। सवाल- ओमान के ग्रुप में इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, स्कॉटलैंड और नामबिया जैसी टीमें हैं? किसे चुनौती मान रहे हैं और ओमान को कहां देख रहे हैं?
जवाब- ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड के साथ टी-20 की टॉप-10 टीमों को भी उनके साथ खेलना कठिन होता है। उनकी टीम अनुभवी है और मानसिक रूप से मजबूत है। हम उन्हें फाइट देने का प्रयास करेंगे। अगर हमारा दिन अच्छा रहा और हमने उस दिन कम मिस्टेक किए, तो शायद हम जीत भी सकते हैं। सवाल- USA और वेस्टइंडीज में हो रहे टी-20 वर्ल्ड कप के दौरान भारतीय टीम भी वहां रहेगी, आप किस खिलाड़ी से मिलना चाहोगे और क्यों?
जवाब- मैं विराट कोहली से मिलना चाहूंगा। वे मेरे फेवरेट प्लेयर हैं। उनका एग्रेसन मुझे मुझे काफी पसंद है। अक्षर पटेल और जसप्रीत बुमराह से मिलना चाहूंगा। ये मेरे कलिग हैं। इनके साथ मैं गुजरात में स्टेट क्वालिफिकेशन के दौरान एक ही रूम में रहा हूं। उस समय दोनों अंडर-19 में नेशनल टीम के लिए भी खेल चुके थे। हम लोग एक ही एकेडमी में एक रूम में रहते थे। उसमें 6 बेड होते थे। अक्षर और बुमराह भी मेरे ही कमरे में रहते थे। सवाल- इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाजों की चुनौतियों से निपटने के लिए कैसी तैयारी कर रहे हैं?
जवाब- ओमान में 140 किमी प्रति घंटे से ज्यादा तेज गति से गेंद फेंकने वाले गेंदबाज नहीं हैं, चूंकि ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड टीम में काफी तेज गति से गेंद करने वाले गेंदबाज होंगे। ऐसे में मैंने तैयारी के लिए क्रीज से दो कदम आगे आकर बल्लेबाजी करता हूं, ताकि गेंद मुझे तेज लगे और मेरी तेज गति की गेंद खेलने का अभ्यास हो सके। मैं सोच नहीं रहा हूं कि मेरे सामने मार्क वुड रहा है या मिचेल स्टार्क आ रहा है। मैं तो बस गेंदबाज की जगह गेंद को देख कर खेलने की रणनीति पर काम करूंगा। सवाल- अगर वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के साथ मैच हुआ। तो कौन सा गेंदबाज चुनौती दे सकता है?
जवाब- टीम इंडिया के खिलाफ खेलना मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी। अगर भारत के किसी एक गेंदबाज का सामना करना चाहूंगा, तो वह मैं जसप्रीत बुमराह को खेलना चाहूंगा। मैं उनके साथ अंडर-19 में खेल चुका हूं। उनकी गेंद पहले की तुलना में काफी इंप्रूव हुई है। उनका सामना करने में दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गजों को दिक्कत होती है। तब भी मैं चाहूंगा कि उनकी गेंद का सामना करूं। सवाल- किस भारतीय खिलाड़ी को अपना आदर्श मानते हैं और क्यों?
जवाब- मैं सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह और सौरव गांगुली को अपने पापा के साथ उन्हें TV पर खेलते देखा है। मैं युवराज सिंह को अपना आदर्श मानता हूं, क्योंकि उन्होंने परफॉरमेंस तो किया ही है, बल्कि उनमें फाइट करने की ललक दिखता है। उनमें एग्रेशन है। वे अपने खेल से भारत को न केवल मैच जिताए हैं, बल्कि वर्ल्ड कप दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई है। सवाल- ओमान में आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
जवाब- जब ओमान गया, तो मुझे ट्रेनिंग पर जाने के लिए टैक्सी को पकड़ने के लिए दो-ढाई KM पैदल जाना पड़ता था, चूंकि ओमान में रेत हैं, यहां टैम्प्ररेचर 40 से 45 डिग्री होता है। ऐसे में पैदल चलना काफी है। उसके बाद 25 मिनट का समय टैक्सी से मुझे अकादमी में जाने में लगता था। ICC के मुताबिक, किसी देश में नेशनल टीम से क्रिक्रेट खेलने के लिए कम से कम तीन साल गुजारना पड़ता है। ऐसे में मेरे लिए जरूरी था कि मैं तीन साल यहां रहूं। सबसे ज्यादा दिक्कत का सामना मुझे कोविड के दौरान हुई। जिस टीम के ओनर ने मुझे ओमान बुलाया था, वे कोविड के समय यहां से चले गए। मेरे पास पैसे तक नहीं थे, खाने के लिए भी लाने पड़ गए। फिर मैंने इंडियन एम्बेसी से मदद मांगी, 6 महीने तक भारतीय दूतावास से मेरे लिए खाना आता था। ये 6 महीने मैं जिंदगी में कभी नहीं भूलूंगा। सवाल- वनडे वर्ल्डकप क्वालिफायर में जिम्बाब्वे के खिलाफ शतक लगाने के बाद आपने जडेजा की तरह तलवार भांजकर जश्न मनाया था। ऐसा क्यों?
जवाब- मैंने सोचा कि मेरी अलग पहचान होना चाहिए। मेरी अपनी अलग सिग्नेचर होना चाहिए। मेरा दोस्त इस तरह तलवार भांजता था। रविंद्र जडेजा भी गुजरात से ही हैं। जडेजा भी अपने जीत का सेलिब्रेट बल्ला भांज कर ही करते हैं। सवाल- ओमान टीम की क्या मजबूत पक्ष है और क्या कमजोर पक्ष है?
जवाब- हमारी टीम की कमजोर पक्ष फील्डिंग हैं। वहीं हमारे फास्ट बॉलर उम्रदराज हैं। हालांकि, वह काफी मेहनत कर रहे हैं। हमारा मजबूत पक्ष बैटिंग और बॉलिंग दोनों ही है। अगर हमारा कोई भी खिलाड़ी मैच के अच्छा कर गया, तो हम अच्छी फाइट दे सकते हैं।

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