Saturday, June 15, 2024
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6 फैक्टर्स में जानिए 17 साल में कितना बदला IPL:पावरप्ले स्कोर 20% बढ़ा, शतक दोगुने रेट से बने; बाउंड्रीज भी ज्यादा लग रहीं

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2024) में 17वें सीजन का लीग स्टेज खत्म हो चुका है। 70 मैचों में ही 10 टीमें 2000 से ज्यादा चौके और 1200 से ज्यादा छक्के लगा चुकी हैं। इस बार 14 शतक भी लगे, जो 17 साल में सबसे ज्यादा है। बाउंड्रीज के साथ 2024 के IPL में पावरप्ले स्कोर, औसत स्कोर और विकेट गिरने के रेट में भी बदलाव हुए। 6 फैक्टर्स में जानते हैं 2008 के मुकाबले 2024 तक IPL कितना आगे बढ़ चुका है। फैक्टर-1: पावरप्ले
i. एवरेज स्कोर 20% तक बढ़ा
2008 में जब IPL शुरू हुआ, तब 59 मैचों में पावरप्ले का औसत स्कोर 46 रन था। यानी शुरुआती 6 ओवरों में टीमें 46 रन बना रही थी। 2023 तक 16 साल मिलाकर भी औसत पावरप्ले स्कोर 46 तक ही रहा। लेकिन इस सीजन बल्लेबाजों का बोलबाला रहा और शुरुआती 6 ओवरों में औसतन 55 रन बनने लग गए। इससे पहले 2017, 2018 और 2023 के सीजन में ही औसत पावरप्ले स्कोर 50 से ज्यादा हो सका था लेकिन तब भी 52 रन ही सबसे ज्यादा औसत पावरप्ले स्कोर रहा। ii. पावरप्ले में टी-20 का बेस्ट स्कोर भी बना
2024 में सनराइजर्स हैदराबाद की पावरप्ले बैटिंग सबसे विस्फोटक रही। टीम ने 6 ओवर में 2 बार 100 रन का स्कोर पार कर दिया, जो IPL सीजन में पहली बार हुआ। SRH ने लखनऊ और दिल्ली के खिलाफ यह कारनामा किया। दिल्ली के खिलाफ तो टीम ने 125 रन बनाए, जो टी-20 इतिहास का सबसे बड़ा पावरप्ले स्कोर है। इससे पहले 2014 में CSK और 2017 में KKR ही पावरप्ले में सेंचुरी लगा सकी थी। फैक्टर-2: औसत स्कोर
i. पहली पारी का औसत स्कोर 200 के करीब पहुंचा
2008 में पहली पारी का औसत स्कोर 161 था, 2009 में तो स्कोर गिरकर 150 पर पहुंच गया लेकिन 2024 में औसत स्कोर बढ़कर 191 तक पहुंच चुका है। 2023 तक 16 साल में पहली पारी में औसतन 164 रन ही बने थे, 2024 में औसत स्कोर 27 रन ज्यादा हो गया। शुरुआती 2 सीजन पहली पारी का औसत स्कोर 156 रन रहा, वहीं पिछले 2 साल में यह बढ़कर 187 तक पहुंच गया। फैक्टर-3: शतक
i. हर 5वें मैच में लग रही सेंचुरी, पहले लगते थे 14 मैच
2008 में टूर्नामेंट के 59 मैचों में 6 शतक लगे, यानी औसतन हर 10 मैच में एक सेंचुरी। 2009 में यह आंकड़ा गिरकर औसतन 30 मैचों तक पहुंचा लेकिन 2024 में हर 5वें मैच में एक शतक लग जा रहा है। 2023 तक 16 साल का औसत निकालें तो एक सेंचुरी के लिए 14 मैच लग रहे थे, यह अब 3 गुना घटकर 5 ही रह गए। यानी हर 5वें मैच में अब एक शतक लग जाता है। ii. 17वें सीजन में लग चुके सबसे ज्यादा 14 शतक
IPL 2024 में लीग स्टेज तक ही 14 सेंचुरी लग चुकी हैं, जो एक IPL सीजन में सबसे ज्यादा है। इससे पहले 2023 में 12 शतक लगे थे, यानी पिछले 2 साल में 26 शतक लग गए। इसके मुकाबले 2008 में 6 और 2009 में तो महज 2 ही सेंचुरी लग सकी थीं। यानी शुरुआती 2 साल के मुकाबले पिछले 2 साल में 225% ज्यादा शतक लग चुके हैं। फैक्टर-4: चौके
i. मैच में औसतन 30 चौके लगने लगे
2008 के सीजन में हर मैच में औसतन 29 चौके लगते थे, 2024 में यह संख्या बढ़कर 30 पर पहुंच गई। यानी एक मैच की औसतन संख्या में ज्यादा बढ़ोत्तरी नहीं हुई। हालांकि 17 साल में पहली बार ही मैच में लगे औसत चौकों की संख्या 30 को छू सकी है। ii. लगातार तीसरे सीजन 2000 से ज्यादा चौके लग चुके
2024 के लीग स्टेज में 2071 चौके लग चुके हैं, IPL में लगातार तीसरे सीजन 2 हजार से ज्यादा चौके लगे हैं। इससे पहले 2013 में ही एकमात्र बार 2000 से ज्यादा चौके लगे थे। 2008 के शुरुआती सीजन के मुकाबले यह संख्या काफी बढ़ चुकी है। 2008 में 1702 और 2009 में 1316 चौके ही लगे थे। फैक्टर-5: छक्के
i. एक मैच में 55% ज्यादा छक्के लग रहे
चौके लगने की संख्या में ज्यादा बदलाव नहीं हुए लेकिन छक्के लगने की स्पीड बहुत तेजी से बढ़ गई। 2008 में एक मैच में औसतन 11 छक्के लग रहे थे, 2009 यह संख्या गिरकर 9 तक पहुंच गई। लेकिन 2024 के सीजन में हर मैच में औसतन 17 छक्के लग रहे हैं। जो 2008 के मुकाबले 55% ज्यादा हैं। 2008 से 2023 तक 16 साल को मिलाकर औसत देखें तो हर मैच में 12 छक्के लग रहे थे। इसके मुकाबले भी इस सीजन 42% ज्यादा सिक्स लग चुके हैं। ii. लगातार तीसरे सीजन एक हजार से ज्यादा छक्के लग चुके
लीग स्टेज खत्म होने तक सीजन में 1208 छक्के लग चुके हैं। जो एक IPL सीजन में सबसे ज्यादा हैं। इससे पहले 2022 और 2023 में भी एक हजार से ज्यादा छक्के लगे थे। 2008 से 2021 तक 14 साल में किसी भी सीजन 850 छक्के भी नहीं लग सके थे। फैक्टर-6: विकेट
i. विकेट गिरने के रेट में बदलाव नहीं हुआ
2008 से 2024 तक 17 साल में IPL के स्कोरिंग रेट में तो बहुत तेजी से बदलाव हुआ लेकिन गेंदबाजों का हाल अब भी पहले सीजन की तरह ही है। पहले सीजन में एक मैच की 2 पारियां मिलाकर औसतन 12 विकेट गिरते थे, अब भी एक मैच में औसतन 12 विकेट ही गिर रहे हैं। यानी गेंदबाजों का लेवल 17 साल बाद भी जस का तस बना हुआ है। ग्राफिक्स: अंकित पाठक

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